पीएनएन स्टोरी :— सोच बदली तो समय भी बदल गया।

पांवटा साहिब :— नागेन्द्र तरूण की कलम से —— लेख की प्रस्तावना में ही अपने पिता श्री चार पंक्तियां याद आ रही है कि :—
वक्त की ठोकर लगी तो अच्छे अच्छे गिर पडै
सबसे लड़ सकता है इंसा वक्त से कैसे लड़े
सब समय की बात है इंसान की औकात क्या
वक्त के पांसे कभी उल्टे पड़ै, सीधे पडै।

यह पंक्त्यिां बाबा हरभजन सिह के पुत्र इन्दरजीत सिंह मिक्का पर एक दम सटीक बैठ रही है।

क्या थे बाबा हरभजन सिंह :— बाबा हरभजन सिंह पांवटा प्रवास के दौरान स्थानीय गुरूद्वारासाहिब में बतौर सेवादार काम करते थे किन्तु उनकी सोच शहर के बुद्धिजीवियो और उद्योगपतियो से कही ऊंची थी। उन्होने शहर के ​लिये मान्टेसरी स्कूल से लेकर डिग्री कालेज और बीएड कालेज तक बनाया और जीवन के अन्तिम पडाव पर जैसे ही उनको आभास हुआ तो गुरूद्वारा श्री पांवटा साहिब के नाम समस्त प्रतिष्ठान कर गये और अन्तिम बिदाई ले ली। उनकी अन्तिम यात्रा में शहर के युवा, महिलाए, बुजुर्ग और समूचे शहर ने उनको नम आखेा से और अश्रुपूरित नेत्रो से बिदाई दी थी। खाली हाथ आए और खाली हाथ गए किन्तु अब भी शहर के लोग उनको एक आदर और श्रद्धा से देखते हे।

अब बात करते है उनके पुत्र इन्दरजीत सिंह मिक्का की :—

इनके जीवन का आरम्भिक काल बहुत ही विवादास्पद रहा है जैसे जैसे उम्र ढलती गयी वे समझदार होते गये और पिता के जाने के बाद धीरे धीरे अपने जीवन व कार्यशैली में बदलाव का प्रयास करने लगे और प्रयास होता भी क्यो ना क्यू कि पुत्र तो बाबा हरभजन सिंह के ही थे।

अ​र्थात जीवन में बदलाव लाए बोल वाणी में बदलाव लाए व्यवहार मे बदलाव लाए और नकारात्मक लोगो से किनारा किया कुछेक चापलूस टाइप के लोगो को किनारे किस और अपने जीवन में बदलाव लाते हुए आगे बढ गये।

अनायास अभी हाल ही में हुए निकाय चुनाव के परिणाम ने बता दिया उनके जीवन में क्या क्या उन्होने बदल के दिखा दिया और लोगो का प्यार, सम्मान इतना मिला कि शहर की कई ताकतो ने उनको चुनाव में हराने के लिये ऐडी से चोटी तक का जोर लगा दिया किन्तु शहर की समस्त नकारात्मक शक्तियां उनको टस से मस नही कर सकी और जीत का सेहरा उनके सिर पर बांध दिया।

इतना ही नही जीतने के बाद भी वे जो जो वादे किए उनको पूरा करने में कोई कोर कसर नही छोड रहे लगातार लोगो के सम्पर्क में है और शहर के लिये कुछ अच्छा करने के प्रयासरत है ताकि आम आदमी को सुविधा मिल सके। जिसके लिये कुछेक कडे कदम उठाने के ​​लिये भी तैयार है। जो सम्भवताया शहर के कुछेक जयचन्दो को समझ नही आएगे और समझ भी गये तो उसमें रोडा अटकाने में कोई कोर कसर भी नही छोडेगे।

यह भी सत्य है कि शहर के उपाध्यक्ष इन्दरजीत सिंह शहर के लिये कुछ बडा करने की सोच रहे है। और यह भी सत्य है कि उनके द्वारा लिए गये निर्णयो से वाहेगुरू के चरणो में स्थान पाए बाबा हरभजन सिंह का भी पूर्ण आशीष उनकेसाथ है क्यो कि वे उनकी सोच को ही आगे बढा रहे है और अपने पिता से बेहतर कुछ शहर के लिये करने की सोच रख रहे है।

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