पांवटा साहिब — कहते है कि बद नाम शव्द में भी अन्त में ”नाम” आता है यह कहावत श्री पांवटा साहिब विकास मंच के फाउण्डर ज्ञान चौहान पर एक दम सटीक बैठ रही है। ज्ञान चौहान के ड्रामे की पोल उस समय खुल गयी जब उन्होने मीडिया में अपना चेहरा चमकाने मात्र की नीयत से डमा रचा। यह ड्रामा बीते तकरीबन 15 दिनो से लगातार सोशल मीडिया पर चैट जीपीटी से पोस्टर बना बना कर स्थानीय राजनैतिक नेताओ प्रतिनिधियो और जीते हुए प्रतिनिधियो को लेेकर पोस्ट की जारही थी। और अपनी ओर ध्यान आकर्षित करने की नीयत से लगातार और बार बार पत्रकार वार्ताए आयोजित की जा रही थी। जिसमें बीते 28 सितम्बर को राजनैतिक दृष्टि से एक बडा ऐलान करने की घोषणा भी की थी और कहा कि ऐसा व्यक्ति आएगा जो राजनैतिक माहौल को एकदम पलट कर रख देगा वेशक विदेश से ही हो या आसमान से टपके आदि आदि विभिन्न बाते ऐसी ऐसी कही जिससे लोगो मन में एक बात तो बैठ गयी कि कोई ना कोई नया विकल्प या तीसरा विकल्प तैयार कर लिया होगा किन्तु जैसे ही एक निजी होटल में पत्रकार पहूंचे। वहां पत्रकार तो निराश हुए ही साथ ही जो गाना लान्च करना था वह भी नही चल सका। और अन्त में एक पोस्टर मीडिया के समक्ष साझा किया कि हम नोटा का बटन दबाऐगे । जो वर्तमान शिक्षा प्रणाली में आठवी के बच्चे को भी पता होता है। और कहा गया कि युवाओ को नोटा का बटन दबाने के लिये जागरूक करेगे। यानि कि खोदा पहाड निकली चुहिया और वह भी मरी हुई यह कहावत इस मंच पर खरी बैठ रही है। मीडिया कर्मियो के दिलो दिमाग में यह भी जद्दोजहद चलती रही कि हो सकता है वहां सैकडो की संख्या में मंच के लोग हो और कोई बडा ऐलान हो जाए किन्तु वहां भी टुस्स्सससससस । गिनती के चार लोग मंचासीन थे। इसके बाद से सोशल मीडिया को हथियार बनाकर मि0 चौहान उछलकूद कर रहे थे वही सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाले लोगो ने उनकी जमकर मिट्टी पलीत कर दी है।
पीएनएन ब्रेकिंग — बद नाम में भी ‘नाम’ है। खुल गयी ढोल की पोल। खोदा पहाड निकली चुहिया।
