‘‘ना रहेगा बांस ना बजेगी बांसुरी”
पांवटा साहिब :— और अब अन्ततोगत्वा डाक्टरो ने अपनी डाक्टरी और कलम की ताकत दिखाते हुए 90 वर्षीय बुजुर्ग महिला को रैफर कर दिया है अब यह तकनीकी बात है कि इसको कोई चेलेन्ज भी नही कर सकता।
बताते चले कि सिविल हस्पताल पांवटा में कुछेक डाक्टर कई दशको से एक ही स्थान पर ड्यूुटी देते चले आ रहे है
बीते दिनों एक 90 वर्षीय बुजुर्ग महिला अपने इलाज के लिये पांवटा के रैफरल हास्पीटल के नाम से बदनाम हास्पीटल पांवटा पहूंची। जहां दो से ढाई घन्टे तक लगातार सांस की बीमारी के चलते नर्स ने आक्सीजन तक उपलव्ध नही करवाई और 90 वर्षीय बुजुर्ग महिला सांस लेने और आक्सीजन के लिये तडपती रही और बाद में नर्स ने जो बदसलूकी तीमारदारो के साथ की उसे पूरे देश ने देखा और परिणाम स्वरूप मीडिया ने जब यह मामला तसल्ली से उठाया तो निदेशक स्वास्थ्य ने सीएमओ से जवाब तलबी की और स्थानीय एसएमओ ने एक कमेटी का गठन कर डाला जिसमें एक मैटर्न को भी जांच कमेटी का सदस्य बनाया। जिसके बाद से मीडिया में लगातार खबरे चलती रही और मैटर्न ने मामले की लीपापोती शुरू कर दी। सर्व प्रथम तीमारदारो को मेटर्न ने धमकाया कहा कि मैडम नर्स से माफी मांग लो और प्रशिक्षु नर्सो को भी धमकाया कहा कि यदि नर्स मैडम के खिलाफ व्यान दिया तो फैल कर दूंगी।
इस सारे हंगामे को देखते हुए डाक्टरो नीति केतहत अपने सिर से बला टाल दी और डाक्टरी से पल्ला झाडते हुए 90 वर्षीय बुजुर्ग महिला को रैफर कर दिया। कहा जासकता है कि ”ना रहेगा बांस ना बजेगी बांसुरी”
इससे पूर्व यह भी बताते चले कि स्थानीय डाक्टरो के इतने बुरे हाल है कि एक 7 वर्षीय बालिका जो कि मामूली बुखार से पीढित थी देर रात्रि में इलाज करवाने और दवा लेने आपातकालीन विभाग में गई तो आपातकालीन विभाग में तैनात डाक्टर ने पर्ची पर लिखित तौर पर दवा तो लिख दी और दूसरे दिन ओपीडी में दिखाने को लिख दिया किन्तु मौखिक रूप से बोल दिया कि नाहन ले जाओ यानि कि पैरासीटामोल तक नही दी। और गरीब महिला टैक्सी करके नाहन गई नाहन से डाक्टरो ने पैरासीटामोल देकर वापस भेज दिया। गरीब महिला के दो से तीन हजार रूपये डाक्टर की लापरवाही गैर जिम्मेदाराना हरकत के कारण खर्च हो गये वह भी वह पैसा महिला कही नाकही से उधार लेकर नाहन तक पहूंची। आखिर इस गैर जिम्मेदाराना हरकत के लिये जिम्मेवार कौन।
