पितामह की एक मुलाकात :— पर्यावरण संरक्षण को तन और मन दोनो समर्पित।

पांवटा साहिब :— बीते रविवार को अनायास यमुना होटल में प्रदेश के प्रथम मुख्य मंत्री रहे डा0 यशवन्त सिंह परमार के प्रपोत्र हुई। बाहर भीनी भीनी से ठंडी हवा चल रही थी और हल्की हल्की बारिश हो रही थी। इतने में यमुना होटल के रिसेप्शन पर तरूण परमार से भेट हुई । भेैट क्या हुई बहुत से बाते हुई लगभग तकरीबन दो घन्टे तक लगातार साथ ही काफी की चुस्की और गपशप। पता चला कि यह शख्श तो वही है जो बीते दो तीन सालो से लगातार पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका निभा रहा है बाद में पता चला कि डा0 स्व0 यशवन्त सिंह परमार इनके पिताश्री के तायाजी थे । फिर तो बाते करने का और भी मन वि​चलित हो उठा। बाते हुई बताया कि इन्होने लगभग 5 बार आईएएस की परीक्षा दी तैयार बेहद जोरदार थी किन्तु आरक्षण के चलते बात नही बनी उसके बाद कई परीक्षाऐ दी और एसएससी परीक्षा उत्तीर्ण कर सरकारी नौकरी लग गयी ।

तरूण परमार की माताश्री डिप्टी डाइरेक्टर ​एजुकेशन कार्यालय में बतौर सुपरिन्टैडेन्ट के पद से सेवानिवृत हुई उन्होने अपने सम्पूर्ण जीवन काल में घर परिवार और ड्यूटी के साथ साथ सामाजिकता और बच्चो को उचित शिक्षा तथा भगवत पूजा में जीवन व्यतीत किया कोविड की दूसरी लहर के कालग्रास का शिकार हुई वही दूसरी ओर पिताश्री की कठोरता के कारण दोनों भाई बहिन नियंत्रण के साथ साथ अनुशासित रहे किन्तु तरूण परमार ने पढाई में ही अपना दिल लगाया और लगातार पढते पढते वेद पुराण उपनिषद आदि आदि कह सकते है ज्ञान का भण्डार अर्जित किया साथ ही गुरूदीक्षा ली जिसमें इनके गुरूजी दण्डीस्वामी श्री कृष्णदेवाश्रम महाराज ने ज्ञान दिया कि राजनीति से दूर रहो उनकी आज्ञा का पालन करते हुए भगवत प्रेम में अपना मन लगाना शुरू कर दिया और कई ग्रन्थ पढे ही नही ​अपितु अपने जीवन में उनको उतारना भी शुरू कर दियां।

जीवन के प्रारम्भिक दौर में डीएवी स्कूल से प्रारम्भिक शिक्षा ग्रहण की और उसके बाद नाहन से जमा दो तक की शिक्षा ग्रहण् की उसके बाद बी टैक की डिग्री पंजाब से इलेक्ट्रानिक्स में इंजीनियरिग कर सर्व प्रथम एस टेल कम्पनी में बतौर मैनेजर आपरेशन्स ज्वाइन किया और सरकारी परीक्षाओ की तेयारी में लगे रहे और2017 में सफलता हासिल कर लोनिवि में पदासीन हो गए।

इनके गुण, व्यावहारिकता, मिलनसार होने का फायदा यह मिला कि अराजपत्रि कर्मचारी महासंघ में बतौर महासचिव के पद की जिम्मेवारी भी सौप दी गयी जिसे लेकर कई मर्तबा कर्मचारियो की मांगो को मुख्यमंत्री तक पहूंचाने और कर्मचारियो के हितो के मुद्दो को जोरशोर से उठाया और सरकार के कानो तक आवाज पहूुचाई और वह भी पूर्ण अनुशासित होते हुए और अहिंसात्मक ढंग से।

बीते ​तीन वर्षो में लगातार पांच सौ से अधिक वृक्ष लगा चुके है ताकि पर्यावरण सुरक्षित रहे और शहर हरा भरा नजर आए विश्व पटल पर शहर की पहचान सुरक्षित पर्यावरण को लेकर बने यही एक तमन्ना इनके दिलो दिमाग में है जिसे लेकर काफी चिन्तित रहते है और ड्यूटी के बाद जहां जहां पौधे लगाए उनकी देखभाल के लिये खुद ही गाडी लेकर निकल पडते है जिनमे कई पौधे तो पशु ने नष्ट कर दिए कई वाहनो की चपेट में आ गए किन्तु जिन जिन पर तार की बाड लगी हुई थी वेसभी सुरक्षित नजर आए जिसे देख इनका तन और मन दोनो प्रफुल्लित हुए। और तब तक बारिश भी थम गयी थी काफी भी खत्म हो चुकी थी और हम दोनो ने बन्द बारिश का मौके पर फायदा उठाते हुए अपने अपने घर की ओर निकल लिए। किन्तु ऐसे शख्श से मिलकर दिल बाग बाग हुआ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *