पीएनएन ब्रेकिंग :— पत्रकार वार्ता मे बिलख बिलख कर रोये माता पिता। सीबीआई जांच की मांग।

पांवटा साहिब :— बीते दिनो आईआईएम धौलाकुआ में मध्यप्रदेश निवासी एक होनहार छात्र की संदिग्ध परिस्थितियो में मौत होने पर पीढित अभिभावको द्वारा आयोजित पत्रकार वार्ता मे सीबीआई जांच की मांग की।

बता दे कि अभी हाल ही में आईआईएम धोलाकुआ सिरमौर में एक होनहार छात्र की संदिग्ध परिस्थितियो में मौत का मामला सामने आया है जिसमें पीढित पक्ष ने आईआईएम प्रबन्धन पर कई सवालिया निशान खडे कर दिये है जिसमें कि समूचा आईआईएम प्रबन्ध तंत्र सवालो के कठघरे में आ कर खडा हो गया है।

बाद दोपहर पीढित माता पिता पुलिस अधीक्षक सिरमौर से मिले और मामले की पूरी जानकारी दी। जिस पर एसपी ने पीढित पक्ष को ठोस कार्यवाही के लिये आश्वस्त किया है।

परिवार केवल न्याय नहीं, बल्कि सच्चाई जानना चाहता है।

मुख्य तथ्य
प्रारब्ध से उसके माता-पिता की अंतिम सामान्य बातचीत मृत्यु से कुछ दिन पहले हुई थी।
20 तारीख की रात को जब माता-पिता ने फोन किया तो फोन लगातार बजता रहा।
21 तारीख की सुबह भी कई बार फोन करने पर फोन बजता रहा।
लगभग 10:28 बजे पिता का WhatsApp संदेश डिलीवर हुआ।
इसके बाद फोन बंद हो गया।
पिता द्वारा संस्थान को सतर्क करने पर केवल इतना बताया गया कि उनके बेटे ने “आत्महत्या का प्रयास” किया है।
बार-बार पूछने के बावजूद प्रशासन, फैकल्टी या निदेशक ने पूरी जानकारी साझा नहीं की।
लगभग 3:21 बजे पुलिस ने परिवार को मृत्यु की सूचना दी।
पुलिस ने यह भी बताया कि शव फांसी पर लटका हुआ नहीं बल्कि कमरे के फर्श पर पाया गया था।
सबसे महत्वपूर्ण और चिंताजनक तथ्य

मृत्यु के बाद परिवार को पुलिस एवं उपलब्ध रिकॉर्ड से पता चला कि प्रारब्ध ने 3 days पहले अपनी कलाई की नसें काटी थीं और उसे एम्बुलेंस से संस्थान के डिस्पेंसरी/अस्पताल ले जाकर उपचार कराया गया था।’

यह अत्यंत गंभीर घटना कथित रूप से माता-पिता को कभी नहीं बताई गई।

यही इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है:

यदि उस समय माता-पिता को जानकारी दी जाती, तो क्या वे अपने बेटे तक पहुँचकर या उसकी सहायता करके इस दुखद घटना को रोक सकते थे?

जांच योग्य प्रश्न
कलाई की नस काटने की घटना माता-पिता से क्यों छिपाई गई?
इस सूचना को न देने का निर्णय किसने लिया?
आत्म-क्षति (Self Harm) की घटना के बाद छात्र की निगरानी क्यों नहीं की गई?
परीक्षा में अनुपस्थित रहने के बावजूद उसकी स्थिति की गंभीर समीक्षा क्यों नहीं की गई?
उसे क्या मनोवैज्ञानिक, चिकित्सीय या परामर्श सहायता दी गई?
मृत्यु के वास्तविक समय और परिवार को सूचना दिए जाने के बीच कितना अंतर था?
CCTV, मेडिकल रिकॉर्ड, हॉस्टल रिकॉर्ड और संचार रिकॉर्ड सुरक्षित रखे गए हैं या नहीं?
माता-पिता द्वारा लगातार संपर्क करने के बावजूद सारी जानकारी क्यों नहीं दी गई?
बुलिंग की पूर्व शिकायतें

प्रारब्ध के पिता ने पहले भी संस्थान को बुलिंग, उत्पीड़न और हॉस्टल सुरक्षा संबंधी शिकायतें लिखित रूप में दी थीं। परिवार का कहना है कि इन शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

परिवार की चिंता

परिवार का आरोप है कि घटना के बाद कुछ लोगों द्वारा यह धारणा बनाई जा रही है कि प्रारब्ध पारिवारिक तनाव या पूर्व मानसिक बीमारी के कारण परेशान था।

परिवार इस दावे का खंडन करता है और चाहता है कि बुलिंग की शिकायतों, संस्थान की भूमिका, तथा कलाई काटने की घटना को छुपाने के पहलू की स्वतंत्र जांच हो।

सार्वजनिक महत्व

यह मामला केवल एक छात्र की मृत्यु का नहीं है।

यह प्रश्न उठाता है कि:

क्या शैक्षणिक संस्थान आत्म-क्षति जैसी घटनाओं की सूचना माता-पिता को देते हैं?
क्या छात्रों की मानसिक सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है?
क्या संस्थान संवेदनशील घटनाओं में पूरी पारदर्शिता बरतते हैं?
क्या किसी स्तर पर गंभीर चूक हुई है?

हम आपसे अनुरोध करते हैं कि इस मामले की स्वतंत्र जांच कर इन अनुत्तरित प्रश्नों को देश के सामने लाया जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके और जिम्मेदारी तय हो सके।

अतिरिक्त गंभीर चिंताएँ जिनकी स्वतंत्र जांच आवश्यक है

परिवार के समक्ष कुछ ऐसी परिस्थितियाँ भी सामने आई हैं जो निष्पक्ष जांच की आवश्यकता को और अधिक महत्वपूर्ण बनाती हैं:

  1. छात्रों के स्वतंत्र बयान लेने में संभावित बाधा की आशंका

परिवार की जानकारी के अनुसार, जिस दिन पुलिस टीम संस्थान में छात्रों के बयान दर्ज करने पहुँची, उसी समय संस्थान द्वारा अवकाश घोषित किए जाने और छात्रों को परिसर से बाहर जाने के लिए प्रेरित किए जाने संबंधी सूचनाएँ प्राप्त हुई हैं।

यदि यह तथ्य सही पाए जाते हैं, तो यह जांच का विषय होना चाहिए कि:

क्या पुलिस को स्वतंत्र रूप से रूममेट्स और अन्य छात्रों से बातचीत करने का अवसर मिला?
क्या संभावित प्रत्यक्षदर्शियों या महत्वपूर्ण जानकारी रखने वाले छात्रों के बयान बिना किसी प्रभाव या दबाव के दर्ज किए गए?
क्या छात्रों की उपलब्धता किसी प्रकार से प्रभावित हुई?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *