पांवटा साहिब — प्रदेश के सर्वाधिक विवादास्पद और बदनाम हास्पीटल का एक और फर्जीवाडा जनता के सामने आ गया है। यह खुलासा गुज्जर कालोनी की निवासिनी बबलीदेवी ने मीडिया के सामने आकर किया है।
मामला कुछ इस प्रकार सामने आया है कि बबलीदेवी को मधुमेह की शिकायत थी वह हास्पीटल में शुगर टैस्ट खाली पेट करवाने गई तो उसकी 203 no. लैब में जांच हुई और रिपोर्ट में खाली पेट शुगर टैस्ट तकरीबन 362 के आस पास दिखाई जो कि चित्र में स्पष्ट रूप से देखी जासकती है। जैसे ही मरीज को यानि कि बबली देवी को शक हुआ तो उसने ठीक उसी समय निजी लैब से शुगर टैस्ट करवाई तो वहां कुछ और ही माजरा निकला उसकी ब्लड शुगर 194 के आस पास बताई गयी। और यदि बबली देवी no 203 लेब की रिपोर्ट लेकर डाक्टर के पास जाती तो डाक्टर ने हाईब्लड शुगर की दवा लिखनी थी और मरीज की जान भी जा सकती थी।
ठीक इसी प्रकार का खिलवाड ना जाने कितने मरीजो के साथ हुआ है। इतना ही नही वहां के स्टाफ का लोगो के प्रति दुर्ववहार भी कई मर्तबा सामने आ चुका है। किन्तु ना तो सरकार कोई कदम उठाती है और ना ही हास्पीटल प्रबन्धन। अभीहाल ही मे पता चला है कि सीटी स्कैन भी नही हो पा रहे है।
इससे पहले भी कई प्रकार के मामले सामने इसी हास्पीटल के आ चुके है। जिसमें एक डाक्टर ने माशुका के चक्कर में नशे की दवाईयां खा ली थी वही डाक्टर पिक प्लाजो गाने पर बावर्दी नर्स से डांस करवा रहा था। उसी नर्स को सरकारी गाडी लेने और छोडने भी जाती रही जो कि जग जाहिर है। इससे पूर्व कई वर्ष पहले आपातकालीन विभाग में एक फर्जी डाक्टर ड्यूटी देता पकडा गया था। खबर पितामह में प्रकाशित होने के एक घन्टे के अन्दर अन्दर शहर से ही भाग गया था उस मामले पर भी लीपापोती कर दी गयी थी। इसके अलावा कई मर्तबा एक्सरे मशीन खराब, अल्ट्रा साउण्ड का गोरखधन्धा निजी लेबो से करवाना और मोटी कमीशन बटोरना डाक्टरो का पेशा ही बन गया है।
धडल्ले से खुल रहे लैब, कैमिस्ट, अल्ट्रासाउण्ड सेन्टर :— शहर में धडल्ले से कैमिस्ट शाप की भरमार हो चुकी है। वही अल्ट्रासाउण्ड के सेन्टर भी आए दिन नित नये खुल रहे है साथ ही पैथोलोजी लैब की भी भरमार हो चुकी है।
खासबात यह भी है कि कैमिस्ट की दुकानो पर बिना डिग्री डिप्लोमा के लोग दवाईयां बेचते नजर आते है। जिनकी सम्बन्धित शिक्षा दीक्षा भी ना के बराबर है। कोई पैमाना नही है। कहावत चरितार्थ होती है कि अन्धी पेसे ………….. खाऐ।
यदि प्रशासन ने इन पर अंकुश नही लगाया तो मरीज इसी प्रकार लुटते रहेगे और मरीजो की जेबोपर इन मेडीकल माफियाओ द्वारा डाका डाला जाता रहेगा। जिलाधीश सरमौर को इस विषय पर तुरन्त संज्ञान लेने की आवश्यकता है।
