पांवटा साहिब — एक ऐसा युवा नेत्री जिसको चौबीस घन्टे पहले तकयह नही पता था कि उसका जीवन किस मोड पर आकर खडा हो जाऐगा। आम दिनचर्या में घर के कामो में अपनी माता का हाथ बटा रही थी कि अनायास पांवटा बार में कार्यरत अधिवक्ता सुखवीर सिंह का जो कि रिश्ते में भाई लगते है का फोन आया और बताया कि जिला परिषद में खोदरी माजरी की सीट ओबीसी रिजर्व है। और शिवानी मेहरा ने हामी भर दी। और हामी भी तब भर दी कि बचपन से अपने दादाओ परदादाओ और उनके दादाओ के कहानी किस्से माता पिता चाचा तारू दादा दादी से सुनती चली आ रही थी। अनायास फोन आया और मुंह से ‘हां’निकल गयी। राजनीति में थोडी बहुत दिलचस्पी थी घर परिवार की बाते सुन सुन कर किन्तु कभी ऐसा नही सोचा था कि एकदम से जिन्दगी इतनी बडी करवट लेगी और आनन फानन में घर परिवार के लोग एकत्र हुए नोटिफिकेशन आने केबादसे ही आस पडोस में बातचीत शुरू की रिश्तेदारो मे बातचीत शुरू की और सबने एक स्वर में हामी भर दी। बस फिरक्या था सिलसिला शुरू हुआ धीरे धीरे कारवां जुडता गया और अपने निकटतम सभी प्रतिद्वन्दियो को धोबी पछाड दे मारा जिसमें भाजपा, कांग्रेस और दो निर्दलीय उम्मीदवारो को चुनावी रण में पटखनी दी। जिसका नाम है शिवानी मेहरा।
कौन है शिवानी मेहरा :— शिवानी मेहरा एक बहुत ही मार्मिक, मृदुभाषी,उच्च शिक्षा प्राप्त और इलाके के सम्भ्रान्त किसान परिवार की सुपुत्री है जोकि चेतराम की प्रपोत्री से भी आगे प्रपोत्री है। बताते चले कि चेतराम वह गिरीपार इलाके के पहले प्रधान है जो 1947 केबाद पहली बार प्रधान चुने गये। और अपने कार्यकाल में जिन्होने ढिण्डाली गांव बसाया जो कि आज भी सरकारी भूमि पर लोग वहां अपना जीवन यापन कर रहे है।
शिवानी का परिवार :— शिवानी मेहरा अपने परिवार में सबसे बडी पुत्री है उनकी एक छोटी बहिन जो शिमला यूनिवर्सिटी में कानूनी की किताबे पढ रही है और शिवानी खुद बीएससी कैमिस्ट्री से उत्तीर्ण हो चुकी है। शिवानी को लेखन का बहुत शौक है वे स्नातक करने के बाद कई प्रतिष्ठानो में लेखन कन्टेट राइटर का काम कर चुकी है। शिवानी ने पहली कक्षा से लेकर दसवी कक्षा तक खोदरी माजरी के सरकारी स्कूल से शिक्षा ग्रहण की 12वी कक्षा भगानी स्कूल से ग्रहण की और बीएससी स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद कई साहित्यिक संस्थानो मे अपनी रूचि के मुताबिक काम भी किया।
गांव व इलाके के लोगो ने बताया :— शिवानी व उनके पिता रघुवीर सिंह जब चुनावी प्रचार में उतरे तो उनको पता चला कि वे खुद किस खानदान से है। इलाके के बुजुर्गौ ने बताया कि उनके दादा के दादा पहली बार प्रधान बने थे स्वतंत्रता के बाद यह खबर इलाके मे आग की भांति फैली इसके बाद उनके दादा जो पांच भाइ्र थे जिसमें कि कैशूराम चुनाव लडे थे और लगभग 18 से 20 वर्ष लगातार प्रधान रहे। बस फिर क्या था घर परिवार और बिरादरी का नारा चल पडा और शिवानी के साथ युवा, बुजुर्ग महिलाऐ, बच्चे एक साथ जुडे और इलाके में अभी भी रूतवा कायम है। यहसभी प्रतिद्वन्दियोको दर्शा दिया।और शिवानी ने व उनके परिवार ने उनके खानदान ने शिवानी के सिर पर ताज पहनाते हुए 9205 मतो से विजयश्री दिलवाई। इसमें खासबात यह रही कि शिवानी ने किसी राजनैतिक पार्टी का सहारा नही लिया और ना ही किसी से मिन्नते की। अपने दम पर अपनी साख, अपना कुशल व्यवहार और बुजुर्गो के आशीर्वाद से चुनाव जीता जिसने हिमाचल के राजनैतिक गलियारो में हलचल पैदा कर दी।
भविष्य में क्या क्या हो सकता है ये कयास लगाए जा रहे :— राजनैतिक गलियारो में शिवानी मेहरा चर्चा का विषय बनी हुई है। आगामी विधानसभाई चुनाव में यदि पांवटा विधानसभा कीसीट महिला रिजर्व होती हैतो सहज ही अन्दाजा लगाया जा सकता है कि जो महिला अपने दमपर मात्र गिरीपार क्षेत्र से 9205 मतहासिल कर सकती है तो वह समूचे विधानसभा क्षेत्र से किस कदर प्रतिद्वन्दियो को पछाडे की और यदि त्रिकोणीय मुकाबला होता है तो वह शिखर पर भी पहूंच सकती है इस प्रकार की सम्भावनाओ से भी इंकार नही किया जा सकता।
अन्ततोगत्वा समूचे प्रदेश के राजनेैतिक गलियारो मे शिवानी की जीत और उनका नाम चर्चा का विषय बना हुआ है। देखना होगा कि उनका झुकाव किधर की ओर जाता है यह तो भविष्य के गर्भ में छुपा है।
