पांवटा साहिब :— शहर में अब जमीने खिसकने लगी है। आप भी सावधान हो जाए। ये जो सारा कारनामा है यह सब सफेदपोश भूमाफियाओ के इशारे पर किया गया और यदि सम्बन्धित व्यक्ति जागरूक और सावधान नही होता तो उसे करोडो की जमीन का चूना लग गया था। यह जमीन 15 बीघा के करीब थी जो बाता नदी के मुहाने पर लगती थी। राजस्व विभाग के पटवारी ने अपने आका नेता को खुश करने के लिये उसकी जमीन ही बाता नदी में दर्शा दी और कव्जा करने अपने गुर्गे भेज दिए वहां मार पिटाई भी हुई बहसा बहसी भी हुई, तू तू मै मै भी हुई मतलब खूब बवाल कटा किन्तु जिस व्यक्ति ने जमीन तकरीबन 10 — 12 साल पहले खरीद की हुई थी। जिसमें बिजली का मीटर भी लगा था। और तकरीबन दो हजार पेड भी खडै थे जो अब करीव दस साल बडे हो गये है। वह बिजली का खम्बा और मीटर सहित सभी पेड पौधे बाता नदी में दस्तावेजो में दर्शा दिए गये।
अब मामले ने जैसे ही तूल पकडा और राजस्व विभाग के कुछेक भृष्ट अधिकारी जैसे ही स्थानान्तरित हुए मामला वर्तमान प्रशासन के संज्ञान में लाया गया और हैरत की बात तो यह भी है कि यह घटनाक्रम भाजपा की सरकार में हुआ और दोनो धुर विरोधियो के सुर इस जमीन को देखकर एक मुंह हो गये ।
अब वर्तमान प्रशासन जिसमें शहर के लाडले एसडीएम गुन्जीत सिंह चीमा और कर्तव्यनिष्ठ व ईमानदार तहसीलदार ऋिषभ शर्मा ने मामला उनके पास आते ही घोर ईमानदारी का परिचय देते हुए अपनी कर्तव्यनिष्ठा का पालन किया और जिस व्यक्ति के साथ घोर अन्याय हुआ था उसे न्याय प्रदान करते हुए उसकी जमीन उसे कानूनी तौर पर वापस दिलवाई जिसकी शहर में जमकर प्रशंषा हो रही है।
यह किसी कवि की दो पंक्तिया बताना जरूरी हो जाता है ताकि आमजन भी सचेत और सावधान रहे कि :— बन्दूको की गोली का उत्तर सद्भाव नही होता । हत्यारो के लिये समर्पण का प्रस्ताव नही होता।
और अब तो गौर करने की बात तो यह भी है कि जिस प्रकार पटवारी ने अपना स्थानान्तरण बचाने और अपने राजनैतिक आका का खुश करने के लिये इतने बडे मामल को अंजाम दिया तो वह पटवारी तो किसी भी दिन अवनीत सिंह लाम्बा का होटल, गुरूद्वारा व मन्दिर देई जी साहिबा को भी कही यमुना नदी और बाता नदी में ना दर्शा दे ऐसी सम्भावनाओ से भी इंकार नही किया जा सकता।
