पीएनएन ब्रेकिंग — 28 सितम्बर को पांवटा में शक्ति प्रदर्शनं ।

पांवटा साहिब — जैसे जैसे भादो की चिलचिलाती तेज धूप से गर्मी का प्रकोप बढा है वही दूसरी ओर राजनैतिक पारा भी सातवे आसमान पर हो चला है। इधर जैसे ही श्री पांवटा साहिब विकास मंच के फाउण्डर ज्ञान सिंह चौहान ने मीडिया में आकर एक बडा धमाका होने का व्यान जारी किया कि 28 सितम्बर को शहर की राजनीति में बडा धमाका करने जा रहे है । इसकी भनक मात्र से भारतीय जनता पार्टी ने आगामी 28 सितम्बर को ही रामलीला मैदान बुक कर लिया और एक बडे आयोजन की भूमिका रच डाली ताकि विरोधियो को उनका पैमाना बताया जा सके। भारतीय जनता पार्टी ने इस आयोजन को जनप्रतिनिधि सम्मान समारोह के साथ साथ कार्यकर्ता सम्मेलन का नाम दे डाला। और एक लिखित प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए सिर उठाने वाले विरोधियो की हवा टाइट कर दी।

इधर इस बारे में श्री पांवटा साहिब विकास मंच के ज्ञान सिंह चौहान से फोन पर बातचीत की तो उन्होने बताया कि वेन्यू का खुलासा वे 26 या 27 को ही करेगे क्यो कि उस दिन हो सकता है शहर के सभी होटलो को भाजपाई बुक कर ले क्योकि वे पैसे वाली पार्टी है किन्तु यह भी निश्चित है कि उनके आयोजन में कोई फेर बदल नही होगी आयोजन 28 सितम्बर को ही होगा किन्तु वेन्यू का खुलासा वे 26 या 27 सितम्बर को ही करेगे।

उन्होने यह भी कहा कि भाजपा की इस हरकत से उनको और भी बल मिलेगा। अब यह सोचनीय विषय है कि हमारे से छोटे से संगठन से भाजपाई इतने घबराए हुए है कि हमारा आयोजन फ्लाप करने के लिये योजना बना रहे है।

देखना होगा कि इन दोनो के शक्ति प्रदर्शन मे कौन किस पर भारी पडता है यह राजनीति की बिसात है जिसमें भाजपा के चौ0 सुखराम को तकरीबन 25 से 30 वर्षो का अनुभव है और उनके साथ साथ भाजपा के बडे दिग्गज भीइस आयोजन में शामिल होगे पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल, सांसद सुरेश कश्यप, विधायक एवं पूर्व ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी, विधायिका रीना कश्यप, पूर्व विधायक बलदेव तोमर तथा भाजपा जिलाध्यक्ष धीरज गुप्ता, महिला मोर्चा की जिलाध्यक्षा शिवानी वर्मा आदि आदि।

यह भी सनद रहे कि अभी हाल ही में बीते दिनो एक निजी आयोजन में जिसमें नेता प्रतिपक्ष पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की उपस्थिति थी वहां भी जहां भाजपा जिलाध्यक्ष का सम्मान तो हुआ किन्तु महिला मोर्चा की शिवानी वर्मा एवं किसान मोर्चा के अध्यक्ष अविनाश सैनी की भी अनदेखी की गयी थी।

एक कवि की पंक्तियां याद आती है कि

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