पांवटा साहिब — शनिवार का दिन भाजपाईयो के लिये ठीक नही रहा है। पांवटा के भाजपाईयो की करतूतो ने निजता की राजनीति के चलते समूचे समाज मे थू थू करवा ली है। जिससे आगामी 2027 के चुनाव में भाजपा को भारी नुकसान उठाए जाने की सम्भावनाओ से इंकार भी नही किया जा सकता।
अब बताते है मामला क्या है। :— मामला है भाजपा की महिला मोर्चा की जिलाध्यक्षा शिवानी वर्मा को लेकर।
बताते चले कि शिवानी वर्मा बीते 15 वर्षो से लगातार भाजपा की निष्ठावान कार्यकर्ता रही है और अपनी सत्यनिष्ठा ईमानदारी, कर्मठता, वाकपटुता और अनुशासित कार्यकर्ता के बलबूते पर जिलाध्यक्षा के पद तक पहुची। और यहां तक पहूचने के लिये उन्होने तन, मन, धन सभी को त्यागने के साथ साथ घर परिवार की जिम्मेवारियो को बखूबी निभाते हुए बच्चो को उच्च शिक्षा प्रदान तक करवाने में कोई कोर कसर नही छोडी।
यह भी सत्य ही है कि उनकी बढती हुई लोकप्रियता, समाज में इज्जत, मान सम्मान और एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में पहचान बनाई जिसे देख पांवटा भाजपा के मुख्य कर्ताधर्ता चौ0 सुखराम को यह हजम नही हुआ। इस प्रकरण में यह भी ध्यान रहे कि इससे पूर्व श्रीमान जी ने, नरेश खापडा, संजय कौशल, शिवसिंह असवाल, संजय सिंघल, निर्मलशर्मा, पूर्व विधायक फतेह सिंह जो कि बिरादरी में अपनी एक अलग ही साख और मान सम्मान रखते थे आदि आदि को खुड्डे लाइन लगाते हुए निपटा दिया और राजा बन बैठै।
अब बात आती है बीते निकाय चुनावो की तब तक चौ0 सुखराम अस्वस्थता और एन्टी इन्क्म्बैन्सी के चले अपनी लाढली को मैदान में उतार चुके थे जिसका नाम नवनीत कौर है। बीमारी के समय नवनीत कौर ने शहर और गांव/पंचायतो में जम कर प्रचार प्रसार किया किन्तु शिवानी वर्मा जैसी वाकपटुता, अपने आप में लाने में नाकामयाब रही। हालांकि जोडतोड की राजनीति से नपा में अपनावर्चस्व कायम तो रख लिया जो कि कांग्रेसियो की आपसी फूट काफायदा मौका पर उठाते हुए मौके पर चौका मार दिया।
ध्यान रहे कि वार्ड नम्बर 5 से शिवानी वर्मा पार्षद हेतु प्रबल दावेदार थी किन्तु शिवानी वर्मा के बढते हुए कदम चौ0 सुखराम को आदतन हजम नही हुए और खुड्डै लाइन लगाते हुए उनको निपटाने की नीति खेलना शुरू दिया और पार्षद हेतु प्रत्याषी नही बनाया किन्तु शिवानी की पार्टी के निष्ठा उन्होने सब कुछ अपना अपमान सहन करते हुए पार्टी मे पूर्ण अनुशासित रहते हुए अपना कार्य करती रही और खून का घूट पीकर बैठ गयी। किन्तु पार्टी के समस्त कार्यक्रमो मेे बढचढ कर भाग लेती रही और अपनी उपस्थिति दर्ज करवाती रही।
हद तो तब हो गयी अपमान की जब बीते दिन वार्ड नम्बर 5 में पार्टी की एक बैठक नई नई बनी पार्षद के घर बैठक का आयोजन किया गया और शिवानी वर्मा को दर किनार किया गया। सब सवाल यह उत्पन्न होता है कि शिवानी को ना बुलाना, अप्रत्यक्ष रूप से उनका अपमान करना औरवह भी महिला मोर्चा की जिलाध्यक्षा का यह फैसला किसका था। या तो चौ0 सुखराम का इशारा था और या मण्डल प्रधान की राजनीति का हिस्सा। सवाल तो सवाल है और इस सवाल का जवाब प्रदेश स्तर तक पार्टी के आला कमान से भी पूछा जाऐगा।
अपमान की पराकाष्ठा देखते हुए शिवानी वर्मा ने सोशल मीडिया के माध्यम से सवाल खडा कर दिया ओर एक पोस्ट डाल दी जो देखते देखते इतनी वायरल हो गयी कि प्रदेश स्तर तक चर्चाओ का विषय बन गयी।
समाचार लिखे जाने तक शिवानी वर्मा पर पार्टी से निष्काशित करने और पोस्ट डिलीट करने के लिये सैकडो फौन आ चुके है देखना है दूध का दूध और पानी का पानी कैसे होता है।
जैसे राम मन्दिर से चन्दा चोरी पर भाजपा चुप है ई 20 के नाम पर चुप है टी 20 के नाम पर चुप है बेरोजगारी के नाम पर चुप है मंहगाई के नाम पर चुप है कालाधन के नाम पर चुप है। सम्भवताया इस मुद्दे पर भी अन्दरखाते नीति अपनाऐगी ओर शायद चुप्पी साध जाए।
