पांवटा साहिब — भयंकर गर्मी के चलते अनायास विजली चले जाने से जनता में भारी रोष देखा जा रहा है। ऐसा नही है कि यह वर्तमान सरकार के समय में ही हो रहा है। भाजपा शासन में भी जब चौ0 सुखराम उर्जा मंत्री थे उस समय भी यही हाल था। विद्युत विभाग में पनप रहे ठेकेदारो और अधिकारियो की मिली भगत का खामियाजा जनता को भुगतना पड रहा है। जिसमें ठेकेदार और भृष्ट अफसर मालामाल हो गए है। जिन ठेकेदारो की औकार साइकिल खरीदने की नही थी वे मात्र कुछ ही वर्षो में मंहगी गाडियो में घूम रहे है। अभी हाल ही में एक कांग्रेसी ठेकेदार की करतूत सामने आई और एक गरीब की जान चली गयी । ठेकेदार का ऐलान जो करना है कर लो क्यो कि व्यवस्था परिवर्तन का साया उसके उपर है। उन्ही की छत्रछाया में इतना बडा काण्ड हो गया। जनता सडको पर उतरने को आतुर हो रही है। किन्तु नेतृत्व विहीन जनता भी क्या करे।
किसी ने लिखा है कि :—
कोई फर्क नही पडता चाहे राजा राम हो या रावण जनता तो बेचारी सीता है।
यदि राजा राम हुआ तो 14 वर्ष को बनवास चली जाएगी
और यदि राजा रावण हुआ तो अशोक वाटिका तले बिठा दी जाऐगी।
आगे यह भी कहा है। कि कोई फर्क नही पडता चाहे राजा कोरव हो या पाण्डव
जनता तो बेचारी द्रोपदी है। यदि राजा कोरव हुए तो भरी सभा में चीर हरण हो जाएगा
और यदि राजा पाण्डव हुए तो जुए में हार दी जाएगी क्यो कि जनता तो बेचारी द्रोपदी है।
नेतृत्व विहीन जनता भी क्या कर सकती है। इधर कांग्रेस के लोग परिवारवाद की चपेट में पुत्रमोह में धृतराष्ट की भाति दुर्योधन को गद्दी सौपने के मुगेरी लाल के हसीन सपने देख रहे है।
वही दूसरे भाजपा के नेता अपनी बेटी को कमान सौपने का गालिब का खयाल पाले हुए है। जिसके लिये कईयो की बलि भी चढा दी गयी।
काग्रेसी भाजपा को अनाप शनाप बोलते है भाजपाई कांग्रेस की हर नीति को गलत बताती है। और जब बेरोजगारी, भृष्टाचार, पेपर लीक, अवैध डम्परो का ताण्डव, ई20 ऐथेनोल, सडको पर खड्डे, टी 20 और पापा 420 मन्दिर में चढावा चोरी के बारे में सवाल यदि पूछे जाते है तो देशद्रोह का तमगा लगना आजकल मामुली हो गया है। साथ ही पुलिस का दुरूपयोग तुरन्त ही प्राथमिकी दर्ज। या चैनल्स को बन्द करवा देना जैसा कि हिमाचल में एक दर्जन के करीव पत्रकारो के चैनल्स बन्द करवा दिए गये जैसा कि अभी कुछ दिन पूर्व शिमला में एक महिला पत्रकार के साथ अभद्रता हुई।
यह सब सत्ता का नशा है सत्ता हाथ से जाते ही इन नेताओ के व्यवहार में नरमी आ जाती है। कह सकते है भूखा मरे या जवान मुझे नोटो से काम। सोशल मीडिया पर एक नेता जी यह भी कहते सुने जा सकते है कि मैने अपने लोगो को सिफारिश से नौकरी पर लगवाया। जब कि हकीकत यह है कि विकास के नाम पर जनता को अभी तक झुनझुना ही मिला है। सतौन से हरिपुरधार तक की सडक बीते 30 सालो से जैसी थी वैसी है। पर्यटन तक को नही सुधार पाए। और हां प्रेस नोट जरूर आ जाता है। कि मंत्री जी 4 दिनो के दौरे पर सिरमौर आ रहे है वे जनता की समस्याओ को सुनेगे जिसमें अधिकांशतया उनके ही लोग होते है और ठेकेदारो की फोज दाए बाए मडराती नजर आती है।
दूसरी ओर लोनिवि के मंत्री है वे सोशल मीडिया पर बोलते नजर आते है कि हम हिमाचल का विकास करेगे उनसे पूछा जाए कि पांवटा में एक भी सडक बनाई हो तो बतादे सम्भवतया कोई जवाब ही नही होगा सारा प्रचार प्रसार जनता के लिये हमदर्दी सोशल मीडिया पर दिए गये व्यान तक ही सीमित है जनाब को कमसे कम धरातल पर आकर देखना चाहऐ।
