पीएनएन ब्रेकिंग — बाबा हरभजन सिंह के प्रतिबिम्ब है इन्दर जीत सिंह मिक्का।

पांवटा साहिब :— कहते है कि सुबह का भूला शाम को घर वापस आ जाऐ तो उसे भूला नही भटका हुआ कहते है। यही हुआ इन्दरजीत सिंह मिक्का के जीवन में और अब वे गुरूघर की सेवा मे लगे हुए है। उनकी सेवा और सुश्रुशा को देखते हुए उनके ही वार्ड के लोगो ने महिलाओ ने युवाओ ने जबरन उनका नामिनेशन भरवाया वे बिलकुल भी इच्छुक नही थे। किन्तु वार्ड के लोगो ने जब जिद पर ही अड गये तो मिक्का मजबूर हुए अपने समर्थको का दिल रखने के लिये हालांकि उन्होने चुनाव ना लडने की कसम खाई थी किन्तु लोगो के प्यार ने लोगो की जिद ने उनको कसम तोडने पर मजबूर कर दिया ।

अब बात करते है स्व0 बाबा हरभजन सिंह की जिनके ये सुपुत्र है। बाबा हरभजन सिंह एक बहुत ही धार्मिक व्यक्तित्व थे और इलाके की खुशहाली, इलाके के विकास में उनका अभूतपूर्व योगदान है जो कि आज तक किसी ने आम जनता के सन्मुख पेशनही किया। किन्तु पितामह सदैव सत्यता के साथ लेखनी चलाता आ रहा है। जो सत्य है वह सत्य ही है और अटल है।

बाबा हरभजन सिंह ने बच्चो की शिक्षा दीक्षा को लेकर कम फीस में एक विद्यालय आरम्भ किया और उसे उचाईयो तक ले गये उसके बाद बाबा जी ने कन्याओ के लिये डिग्री कालेज की स्थापना की और खुद की स्वयं की मेहनत से सुबह तीन बजे उठकर भवन में पानी डालते हुए दिख जाते थे जो कि आज एक विशालकाय भवन है। यह सब बाबा हरभजन सिंह ने इलाके की कन्याओ के लिये किया ताकि उनके कन्याओ के लिये अलग से एक महाविद्यालय हो सके इसके बाद बाबा हरभजन सिंह ने लडकियो के लिये बी एड कालेज की स्थापना कीऔर उसे नया मुकाम देते हुए उचाईयो तक ले गये जिसमें कि वर्तमान समय में भी इलाका व उसके आस पास के क्षेत्र की लडकियां शिक्षा ग्रहण कर रही है। साथ हीसाथ बाबा जी ने विशाल गुरूघर का निर्माण भी करवाते रहे जहां कि आज देश विदेश से हजारो क्या लाखो की संख्या में संगते माथा टेकने आती है।

सबसे ज्यादाा खास बात यह है कि जीवन के अन्तिम पडाव पर पहूंचने से पहले ही बाबा हरभजन सिंह ने समस्त प्रापर्टी जिसमें स्कूल, कालेज, बीएड कालेज, गुरूद्वारा जो कि बाबा जी ने अपने खून पसीना बहाकर बनवाया बडे गुरूद्वारे के नाम कर गये। यह एक मिसाल कायम की और इंसान खाली हाथ आता है खाली हाथ जाता है वही हुआ।

और अब उन्ही स्व0 बाबा हरभजन सिंह का अंश इन्दरजीत सिंह मिक्का अपने पिताश्री के पदचिन्हो पर चलने का प्रयास कर रहे है उनमें भारी बदलाव है। जनसेवा की भावना है लोगो के दुख सुख में खडे होने के लिये सदैव तत्पर दिखाई देते है। साथ ही किसी गरीब को दान दक्षिणा देने से भी परहेज नही करते । और ऐसा व्यक्ति जब इलाके का वार्ड का प्रतिनिधित्व करना चाहता है तो उसको एक बार चांस देना वार्ड के लोगो की जिम्मेवारी बन जाती है। ताकि वे वार्ड में खुशहाली ला सके स्वच्छता ला सके और कमीशन खोरी पर विराम लग सके।

इन्दरजीत सिंह मिक्का ने पितामह के माध्यम से अपील की है मेरी जीत भी आपके चरणो में होगी और मेरी हार भी आपको ही समर्पित होगी फैसला वार्ड के लोगो ने करना है।

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