पांवटा साहिब — शहर के प्रतिष्ठित जे0सी0जुनेजी चैरीटेबल हास्पीटल अब खासकर गर्भवती महिलाओ के विशेष डाक्टर अलका को नियुक्त कर लिया है। डा0 अलका वैसे तो देहरादून की रहने वाली है और उनका समस्त जीवन काल यानि कि आरम्भिक शिक्षा दीक्षा एम0के0पी स्कूल देहरादून में जमा दो तक हुई। उसके बाद नए जीवन के शुरूआती दौर में उनके प्रेरणाश्रोत उनके बडे भाई बने जो अपनी प्यारी से बहिन अलका को दिलोजां से प्यार करते थे उनकी दिलीय इच्छा थी अलका डाक्टर बने और अलका ने भी उसी दौर में लगातार 18 — 18 घन्टे लगातार पढाई कर वर्ष 1998 में सीपीएमटी कीपरीक्षा उत्तीर्ण कर ली। किन्तु सेन्टर यानि कि कालेज झांसी में मिला तो वहां नही गयी ओर फिर दोबारा अटेम्प्ट किया तो वर्ष 1999 में बीआरडी मेडीकल कालेज गोरखपुर से एमबीबीएस की पढाई पूरी की।
तीन बहिनो की अकेली बहिन ने अपने पिता और बडे भाई के सपना को साकार कर एमडी गाइनेकोलोजी में लखनउ से की। जिसमें कि सम्पूर्ण भारत में चौथा स्थान प्राप्त कर अपने माता पिता का नाम रोशन किया। 2013 में वे पूर्ण रूप से विशेषज्ञ बन गयी और उसके बाद मरीजो की सेवा करने की ठान ली।
उनका विशाल हृदय, मधुर वाणी और मरीजो के प्रति लगाव के कारण वे एक कुशल और विशेषज्ञ भी है जिन्होने अल्प समय में ही लगभग 1500 सफल सीजेरियन आपरेशन कर महिलाओ को नया जीवनदान दे चुकी है। इसके अलावा खासबात यह भी है कि वे अपने जीवन काल में पैसे को महत्व नही देती उनमें सिर्फ और सिर्फ महिलाओ के प्रति सेवाभाव पनप रहा है। खासकर वे गर्भवती महिलाओ को पहले तो पूरी कोशिश करती है कि नार्मल् डिलीवरी हो जाए जिसके लिये वे 24 घन्टे लगातार गर्भवती महिला ड्यूटी पर तैनात नर्स और मरीज के साथ आए अटेण्डेन्ट के सम्पर्क में रहती है जब तक पूर्ण रूप से मरीज स्वस्थ्य होकर घर नही चला जाता है।
डा0 अलका इन्देश, हिमालयन इन्स्टीटयूट आफ मेडीकल साइंस में लगभग 18 माह तक सीनियर रेजीडेन्ट के पद पर सेवाऐ दे चुकी है।
खासबात यह भी बताई कि उनकी दिलीय इच्छा थी कि वे दूर दराज के गांवो में जाकर निरक्षर महिलाओ की सेवा करे उनको ज्ञान दे और स्वास्थ्य के प्रति सचेत करे उनकी यह इच्छा भी पूरी हुई और उन्होने उत्तराखण्ड के टिहरी में आठ वर्षाो तक सेवाऐ दी। डा0 अलका ने बताया कि दूर दराज के गांवो के लोग शहरी लोगो की अपेक्षा ज्यादा स्वस्थ्य होते है। वहां का वातावरण, खानपान का स्वास्थ्य पर विशेष प्रभाव पडता है। जिस कारण उनको ज्यादा परेशानियो का सामना नही करना पडा किन्तु उस आठ वर्ष के समयाकाल में उनको दूर दराज के क्षेत्रो में बहुत ही प्यार और सम्मान मिला जिसकी वे उन लोगो की आजीवन ऋणी रहेगी।
वर्तमान समय में डा0 सहगल और मि0 त्यागी के अथक प्रयासो से लोगो की सेवाओ और खासकर महिलाओ को बेहतर सुविधाऐ मिल सके उनको नियुक्त कर दिया है। इसके अलावा मि0 त्यागी की जनसेवा की सेाच और डा0 सहगल लोगो के प्रति सकारात्मक सोच अच्छे विचार आमजन मानस की सेवा भाव के चलते जुनेजा हास्पीटल में बहुत से सेवाऐ नि:शुल्क करदी है जिसका सीधी सीधा लाभ स्थानीय जनता को पहूुचेगा। मसलन ओपीडी फ्राी किसी डाक्टर से परामर्श पर कोई शुल्क नही देना। गर्भवती महिलाओ की नार्मल और सीजेरियन डिलीवरी एकदम सस्ते दामो पर। खासबात यह भी सामने आ रही है पांवटा ही नही अपितु नाहन व दूर दराज के क्षेत्रो के लोग अपने घुटने कूल्हे बदलवाने के लिये जुनेजा हास्पीटल की ओर रूख कर रहे है। यह भी पता चला है कि जुनेजा हास्पीटल में दवाऐ भी बाजार से आधे दामो पर मिलती है।
इतने लम्बे चौडे वार्तालाव के बाद हमारी चाय की प्याली समाप्त हो गयी और हम उठकर चल दिए कुल मिलाकर दिल को एक खुशी हुई कि शहर में एक अच्छी महिला डाक्टर जिसमें सेवाभाव है कमीशनखोरी का कोई लफडा नही है। कोई बार बार अल्ट्रासाउण्ड का झंझट नही अगर वास्तव में जरूरत पडी तो करवाया जाता है अन्यथा नही।