पीएनएन ब्रेकिंग — सरकार के आदेश डीएफओ के ठैगे पर। सरकार ने लगाया वैन, डीएफओ ने लगाया लंगर अवैध कटान का।

पांवटा साहिब — भृष्टाचार के दलदल में आकण्ठ तक डूबे वन विभाग के भृष्ट अधिकारी की पोल तब खुल गयी जब पंचायत प्रधान ने भी पुष्टि कर दी और मीडिया के कैमरो के सामने अनुत्तरित हो गए डीएफओ। कभी अवैध पकडी गयी लकडी को खैर ना बताकर तो कभी पेड की सूखी टहनियां बताकर वन काटुओ के अन्नदाता बनने का प्रयास करते रहे। हालांकि ​हिन्दू वादी संगठनो के सक्रिय पदाधिकारियो व दर्जनो की संख्या में उपस्थित एक दो नही कई लोगो ने वह पराली के नीचे छुपी अवैध खैर की लाखो रूपये की लकडी छुपाई गयी दिखाई गयी किन्तु डीएफओ व उनक कारिन्दे बात को मानने पर राजी ही नही हुए और पेड की टहनियां ही बताते रहे और बाद में प्रवासियो की लडकी शादी की बात कहने लगे और फिर उसे बेचकर शादी की बात कहने लगे फिर कहने लगे कि हमने तो पांच सौ रूपये का चालान भी काट दिया है। कुल मिलाकर वन काटुओ को संरक्षण देने वाले डीएफओ अनुत्तरित रहे जिससे गुस्साए हिन्दू वादी संगठनो के पदाधिकारियो ने तीन दिन का अल्टीमेटम देते हुए तीन दिन बाद विशाल धरने प्रदर्शन का ऐलान तो कर ही दिया साथ ही सभी लोगो के भण्डारे का आयोजन भी वही रख दिया और खासतौर पर डीएफओ व उनके स्टाफ को भी निमंत्रित कर दिया कि हम आपको भण्डारा खिलाऐगे।

ऐसी किरकिरी किसी की नही हुई :— जो किरकिरी आज दोपहर को वन विभाग के कार्यालय के बाहर वन काटुओ के अन्नदाता डीएफओ की हुई वह आज तक किसी अधिकारी की नही हुई वे अपनी अपनी झाडते रहे और अपने ही जवाबो में खुद ही उलझते रहे।

कैसे हुआ मामले का खुलासा :— गौकशी मामले में मानपुर देवडा में जब हिन्दूवादी संगठनो के कार्यकर्ता अंश ढूढ रहे थे तभी किसी की नजर पराली में छुपी अवैध लकडियो पर पडी और वीडियो बनानी शुरू कर दी। इधर जैसे जैसे मामले ने तूल पकडा वैसे वैसे जल्दी जल्दी में अपने बचाव में डीएफओ ने पांच सौ रूपये की रसीद भी काट डाली जब कि लकडी लाखो रूपये की थी जिससे स्पष्ट तोैर पर जाहिर हुआ कि वे वन काटुओ के मुख्य संरक्षक है और उनके व्यान से भी साफ जाहिर हो रहा है जो कि सोशल मीडिया पर चला हुआ है मौका पर तमाम मीडिया हाउस और तमाम हिन्दूवादी संगठनो के कैमरे आन थे कुछेक आन एयर भी थे जो कि किसी से छुपा नही है। इधर सुक्खू सरकार खैर पर वैन लगा रही है और डीएफओ ने खुली छूट दे रखी है तभी किसी का फोन तक नही उठाते और माल लपेटने में मगन है।

दूसरी बात उनकी ही नाक के नीचे उनके कार्यालय के समीप जमीन पर कव्जा हो रहा है और उनके अधीनस्थ फील्ड के कर्मचारी अवैध कव्जाधारी को बचाने में जुटे हुए है। फोटो दिखाने के बाद जिस प्रकार वन काटुओ को बचाने का नाकाम प्रयास करते देखे गये ठीक उसी प्रकार अवैध कव्जाधारी को भी बचाते देखे गये सम्भवतया वहां से भी कुछ ना कुछ आशीर्वाद स्परूप आ गया होगा।

कुल मिलाकर हिमाचल की प्राकृतिक संम्पदा के साथ खेला हो रहा है जिसमें इस प्रकार के अधिकारी फेल्योर साबित हो रहे है वन काटुओ को सरक्षण​ मिला हुआ है। अवैध खनन का खुल्ला खेल मुरादावादी हो रहा है।

हिन्दूवादी संगठनो के कई बुद्धिजीवियो ने डीएफओ के स्थानान्तरण की त्वरित प्रभाव से सरकार से मांग की है। कहना है कि इस प्रकार के भृष्ट अधिकारियो की पांवटा साहिब में आवश्यकता नही है।

उधर जिलामुख्यालय नाहन में भी हिन्दूवादी संगठनो ने एक पत्र वन विभाग के अधिकारियो केा सौपते हुए मांग कर डाली है। मामला अब जिला स्तर तक का हो गया है। सम्भावना प्रकट की जा रही है कि तीन दिनो में यदि सही से कार्यवाही नही हुई तो यह आन्दोलन तीन दिन बाद बडा रूप भी ले सकता है।

अब तो लोग वन विभाग के कर्मचारियो की प्रापर्टी की भी जांच की मांग करने लगे है। हालांकि अभी दबी जुबां से बोल रहे है किन्तु यह मामला भी शीघ्र ही आग पकडने वाला है जिसकी सम्भावनाओ से इंकार नही किया जा सकता। ‘ कि किस किस के घर में शीशम की लकडी के दीरवाजे लगे और कहां से लकडी आई कहां से करोडो की प्रापर्टी अर्जित की गयी।

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