पांवटा साहिब — जिला सिरमौर के पांवटा साहिब में वर्तमान में द ग्रेट खली का झूटा प्रोपेगण्डा परवान चढ रहा है जिसमें वे अपनी लोकप्रियता का फायदा उठाकर एच ए एस अधिकारियो पर मीडिया के माध्यम से दवाब बना रहे है। जिसके लिये खली ने पांवटा के निहायत ही ईमानदार, कर्तव्यपरायण, जुझारू और कर्मठ तहसीलदार पर कीचढ उछालने का प्रयास किया है किन्तु उनके सभी के सभी प्रयास नाकामयाब हो रहे है । क्यूंकि अपने कार्यकाल में तहसीलदार पांवटा ने इतने नेक और ईमानदारी से परिपूर्ण अपनी ड्यूटी का निर्वहन करते हुए आम जन मानस की तकलीफो को सुन दिलोजां से मदद की है उनके काम किए है औरहर किसी के दुख सुख के साक्षी और साझी रहे है जिसकेपरिणाम स्वरूप आज पांवटा शिलाई सतौन और आस पास कीपंचायतो के लोग उनकी ईमानदारी की कसम तक नही खाते।
वही दूसरी ओर एक अशिक्षित व्यक्ति जिसने आज तक समाज के लिये एक फूटी कौडी भी खर्च नही की तथा अशिक्षित का तमगा अपने उपर लटकाए बार बार मीडिया में आकर अपनी प्रतिष्ठा को दाव पर लगाता हुआ एक एचएस अफसरो पर अनाप शनाप शव्दो का इस्तेमाल करतेहुए लोकतंत्र की न्यायिक प्रणाली पर सवालियां निशान खडे कर रहा है।
हैरत की बात है कि अपनी तीसरी पत्रकार वार्ता में उसने शहर के लाढले एचएएसअफसर एसडीएम गुन्जीत सिंहचीमा तक को नही छोडा। इससे भी ज्यादा हैरत कर देने वाली बात तो यह भी है कि उसने आईएएस जिलाधीश सिरमौर पर विश्वास नही हुआ। हालांकि जिलाधीश ने खली की बात सुनते ही त्वरित प्रभाव से जांच के आदेश जारी कर दिए थे किन्तु जांच पूरी होने से पहले ही खली ने प्रदेश की राजधानी में जाकर पत्रकार वार्ता कर अधिकारियो पर टीका टिप्पणी कर डाली और सभी को संलिप्त बता डाला यही उन्होने अपनी निरक्षरता का परिचय भी दे डाला
इससे पूर्व की घटना है यानि कि मामले में प्रथम दृष्टया खली तहसीलदार कार्यालय पहुचे थे और तहसीलदार पांवटा ऋिषभशर्मा के आफिस में तीन घन्टे बैठे फोटो ग्राफी भी हुई वहां बैठकर चाय भी पीकर आए किन्तु जब अफसर ने उनकी बात नही मानी जो वे करवाना चाहते थे गैर कानूनी काम तो वे तिलमिला गए और कुछ दिन बाद पत्रकार वार्ता आयोजित कर डाली पांवटा साहिब में स्प्ष्ट है कि वे मीडिया के माध्यम से दवाब बनाना चाहते थे और बना भी रहे है।
अब बात यहां नही बनी तो जिला मुख्यालय में जाकर कुछ दिनो उपरान्त पत्रकार वार्ता की और वही पुराना राग अलापने लगे वहां भी बात नही बनी तो शिमला जाकर पत्रकार वार्ता कर डाली और प्रदेश स्परीय मामला बना दिया। फिर भी सन्तुष्टि नही हुई तो मुख्यमंत्री से मिलने पहूंच गये कही ना कही अपनी लोकप्रियता को आडे लाकर अधिकारियो पर दवाब बनाते रहे।
इधर मामले को तूल पकडता देख शहर के वरिष्ठ अधिवक्ता अनिन्दर सिंह नौटी ने अपनी वकालत की बारीकियो को देखतेहुए कानून की पैनी दृष्टि पूरे मामले पर डाली जिसमें वे एक पक्ष की ओर से वकील भी है। उन्होने मीडिया के सामने आते ही बताया कि सर्व प्रथम वे तहसीलदार का नाम ले रहे है जोकि तकरीम ऋिषभ शर्मा ने की ही नही वह तो नायब तहसीलदार ने की है।और वे जिस खाता नम्बर की बात कर रहे है उसमें पहले कभी भी ना तो खली और ना ही उनके पुरखे और पुरखो के भी पुरखे उस खाता में हिस्से दार रहे है।
साथ ही यह भी कहा कि कानून तो कानून के दृष्टिकोण से ही अपना काम करेगा। अब वे चाहे मुख्यमंत्री के पास जाए या प्रधानमंत्री के पास जो कानून में सही होगा वही होगा। किन्तु अधिवक्ता ने प्रश्न भी उठाते हुए कहा कि यदि वे अपनी जगह सही तो कानून का दरवाजा खटखटाए बार बार क्यू मीडिया में आकर सुर्खिया बटोरने का प्रयास कर रहे है।
इधर शहर के बुद्धिजीवी वर्ग ने भी टिप्पणी करना शुरू कर दिया है क्यो कि सोशल मीडिया के जमाने में सूचनाओ का तुरन्त ही प्रसार हो जाता है अधिकांशतया लोग खली को ही दोषी मान रहे है। कहते है उनको न्याय पालिका पर भरोसा रखना चाहिऐ और उनके पास कोई वैद्य दस्तावेज है तो न्यायालयक की ओर रूख करे जहां उनकेा सौ प्रतिशत न्याय मिलेगा।
औरशहर के तमाम बुद्धिजीवी यह भी कहते है कि जिस भाषा शैली काप्रयोग वे अपनीपत्रकार वार्ता में कर रहे है जिसकी जितनी निन्दा की जाए कम है।
