पांवटा साहिब — शहर की दबंग यूनियन के प्रधान पर प्राथमिकी दर्ज। क्या है पूरी कहानी के पर्दे के पीछे का सच।
मामला स्थानीय उद्योगपति युवक द्वारा दर्ज प्राथमिकी के बाद सामने आया । मामला कम्पनी के बाहर से ट्रक को उठाने को लेकर सामने आया है। दरअसल जसमेर सिंह उर्फ भूरा सिरमौर ट्रक आपरेटर्स यूनियन के प्रधान है। और उनको शिकायत मिली कि किसी ट्रक पर यूनियन का लोगो लगा हुआ है। और वह ट्रक यूनियन में दर्ज नही है।
सर्व प्रथम जसमेर सिंह भूरा ने अपने स्टाफ को ट्रक के बारे में रिकार्ड खंगालने के आदेश दिए और जब पूर्ण तसल्ली कर ली गई तो वैरीफिकेशन भी करवाई गयी और वास्तव में ट्रक पर एसटीओयू का लोगो लगा पाया गया तो ट्रक को खुद उठाकर जबरन यूनियन ले आए मय माल ले आए बात सिर्फ इतनी सी थी।
अब सवाल है कि यदि ट्रक में कोई गैर कानूनी कार्य किया जा रहा होता तो प्रथम दृष्टया यूनियन की बदनामी होनी थी क्यो कि ट्रक पर यूनियन का लोगो था और वह ट्रक यूनियन में दर्ज ही नही था।
और अब बात करते है जसमेरसिंह भूरा की युनियन के चुनाव के समय भूरा ने सभी आपरेटर्स को वादा किया था किबोर्ड पर काम बढायेगे और सभी आपरेटर्स को अच्छा काम मिलेगा जो कि तत्कालीन प्रधान के समय नही दिया जा रहा था। कहावत चरितार्थ हो रही थी कि ” भाड़ में जाय जनता जब अपना काम बनता” अपनी खुद की चांदी हो रही थी और आपरेटर्स भुखमरी के कगार पर थे।
भूरा ने बीढ़ा उठाया और आपरेटर्स ने जसमेर सिंह भूरा को अपने सिर का ताज पहना दिया। तभी से जब से जसमेर सिंह भूरा ने कार्यभार सम्हाला आपरेटर्स को अच्छा काम मिलने लगा और सभी आपरेटर्स के जीवन मे एक उजाला की किरण सी दिखने लगी। सभी आपरेटर्स भूरा के शुक्रगुजार होने लगे।
खासबात यह भी है जब भी भूरा ने किसी भी प्रकार का ताण्डव किया है उस सबके पीछे खुद का लाभ कभी नही सोचा, और सोचा तो सिर्फ यूनियन के हित की बात ही सोची और आपरेटर्स के हित की बात सोची और शहर के शातिर राजनैतिक व्यक्तियो ने भूराको बदनाम करना शुरू कर दिया पीठ पीछे धीरे धीरे जसमेर सिंह भूरा की छवि लोगो के दिलो दिमाग में ऐसी बिठा दी कि भूरा ही ठीक नही है किन्तु सत्यता कुछ और ही थी। जसमेर सिह भूरा यूनियन के हित और आपरेटर्स के हित के लिये किसी से भी उलझ जाता था और पीछे बैठे शातिर लोग अपनी छवि साफ सुथरी बताते हुए भूरा कोबदनाम करने पर तुल जाते और खुद भले बने रहते। किन्तु जैसे जैसे धीरे धीरे समय बीता और जसमेर सिंह भूरा ने ना सिर्फ अपनी छवि कोसाफ सुथरा और स्वच्छ बनाया बल्कि ऐसे तीस मारखाओ को चुनाव में पटखनी दे डाली जिसकी उम्मीद भीनही की जा सकती थी क्यो कि जसमेर सिंह भूरा की सत्यता आपरेटर्स पहचान गये थे।
ठीक यही कारण ट्रक को उठाने का था कि कही कोई दोनम्बर का काम तो नही हो रहा उस ट्रक में जिसमें यूनियन का लोगो लगा हुआ है और वह यूनियन में दर्ज नही है।
खैर मामला जो भी हुआ समाचार लिखते लिखते एक आपरेटर ने सूचना भेजी हैकि दर्ज प्राथमिकी वाले मामले में जसमेर सिंह भूरा को जमानत भी मिल गयी है। ”अत: कहावत चरितार्थ होती है कि प्राण जाय पर वचन ना जाय”
